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गया: मोक्ष की नगरी गया में ‘विष्णुपद कॉरिडोर’ (Vishnupad Corridor) का सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। सोमवार को जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने पंडा-पुरोहितों, नगर आयुक्त और आर्किटेक्ट्स के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में तय हुआ कि कॉरिडोर को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा, लेकिन परंपराओं से कोई समझौता नहीं होगा।
📌 बड़ी बातें: कॉरिडोर में क्या होगा खास?
बैठक में लिए गए फैसलों ने साफ कर दिया है कि गया की धार्मिक विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जाएगा:
- पुरानी परंपराएं सुरक्षित: मंदिर के गर्भगृह के पास स्थित 16 वेदियों को नहीं छुआ जाएगा, वे यथावत रहेंगी।
- फल्गु तट पर ही होगा पिंडदान: पिंडदान की सदियों पुरानी व्यवस्था फल्गु नदी के किनारे ही जारी रहेगी।
- विरासत का संरक्षण: शिजुआर धर्मशाला और आसपास के ऐतिहासिक भवनों को ‘Heritage Structure’ के रूप में संवारा जाएगा।
- नदी के बीच में भव्य प्रतिमा: सीताकुंड और मानपुर बाईपास के बीच फल्गु नदी में भगवान विष्णुपद की एक विशाल पेडेस्टल प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव है।
- साफ रहेगा फल्गु का पानी: नदी के ठहरे हुए पानी को साफ रखने के लिए ‘एरेटर’ (Aerators) लगाए जाएंगे।
📱 श्रद्धालुओं के लिए ‘स्मार्ट’ सुविधाएं
अब गया आने वाले तीर्थयात्रियों को तंग गलियों और अव्यवस्था से मुक्ति मिलेगी। कॉरिडोर के तहत ये सुविधाएं मिलेंगी:
- सुविधाएं: आधुनिक शौचालय, चेंजिंग रूम, शुद्ध पेयजल और छायादार शेड।
- हाई-टेक सुरक्षा: पूरे इलाके में CCTV निगरानी, पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन और सुरक्षा जांच चौकियां।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: अंडरग्राउंड ड्रेनेज, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और उन्नत कैस्केड लाइटिंग सिस्टम।
- कनेक्टिविटी: सीताकुंड, मंगलागौरी और अक्षयवट को भी इस कॉरिडोर का हिस्सा बनाया जाएगा।
🔀 दुकानदारों का क्या होगा?
भीड़भाड़ कम करने के लिए मंदिर के आसपास के दुकानदारों और फेरीवालों को व्यवस्थित (Reorganize) किया जाएगा। इसके अलावा, पार्किंग के लिए भी बड़े स्तर पर जगह बनाई जाएगी ताकि जाम की समस्या खत्म हो सके।
🚩 ‘विरासत भी, विकास भी’
डीएम शशांक शुभंकर ने स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य गया की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाते हुए उसे एक वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट हब बनाना है। इस योजना पर HCP Design, Planning and Management Pvt. Ltd. काम कर रही है।
संपादकीय टिप्पणी: विष्णुपद कॉरिडोर न केवल बिहार के पर्यटन को नई ऊंचाई देगा, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के लिए ‘पिंडदान’ की प्रक्रिया को भी सुगम बनाएगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विकास की इस दौड़ में गया की पौराणिक पवित्रता बरकरार रहेगी।
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