मुख्य अंश (Key Highlights):
- खेत से लौट रही युवती के साथ रास्ते में छेड़खानी और हाथापाई का आरोप।
- शिकायत करने गए दलित परिवार को जातिसूचक गालियाँ दी गईं और मारपीट की गई।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज, पुलिस जांच शुरू।
मुख्य समाचार (The Lead)
बिहार के गया जिले के अतरी थाना क्षेत्र में एक युवती के साथ छेड़खानी और उसके परिवार के साथ जातिगत भेदभाव व मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। घटना 18 मार्च 2026 की दोपहर करीब 12 बजे की है, जब पीड़िता अपने खेत से फसल लेकर लौट रही थी। पीड़ित पिता की शिकायत पर पुलिस ने अतरी थाना में कांड संख्या 130/26 दर्ज करते हुए चार नामजद आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
विस्तृत रिपोर्ट
खेत से लौटते समय छेड़खानी का आरोप
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, ग्राम पचरुखी निवासी शिकायतकर्ता का परिवार उत्तर पुरनका डीह बाध में खेसारी की फसल काटने गया था। दोपहर करीब 12 बजे जब उनकी बेटी बोझ लेकर खलिहान जा रही थी, तब रास्ते में झाड़ियों के पीछे घात लगाकर बैठे आरोपी कन्हैया कुमार ने उसका रास्ता रोक लिया। आरोप है कि कन्हैया कुमार ने युवती का हाथ पकड़ लिया, बालों से खींचकर जबरदस्ती की और विरोध करने पर थप्पड़ मारे। युवती के चिल्लाने पर जब उसका भाई मदद के लिए दौड़ा, तो आरोपी मौके से फरार हो गया।
शिकायत करने पर परिवार के साथ मारपीट और धमकी
घटना के बाद जब पीड़ित पिता, अपनी पत्नी और ग्रामीणों के साथ आरोपी के घर (ग्राम महापुर) उलाहना देने पहुंचे, तो स्थिति और बिगड़ गई। आरोप है कि वहां मौजूद पिंटू सिंह उर्फ कारू सिंह, छोटू कुमार और नीतू देवी ने परिवार को देखते ही जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग किया। शिकायतकर्ता का दावा है कि आरोपियों ने उन्हें ‘भुइया-हरिजन’ कहकर अपमानित किया, उनके साथ मारपीट की और दोबारा घर आने पर जान से मारने की धमकी देकर वहां से भगा दिया।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएं
अतरी थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर निम्नलिखित धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है:
- BNS धाराएं: 126 (2), 115 (2), 74, 352, 351 (2), और 3 (5)।
- SC/ST एक्ट: धारा 3 (1) (i), 3 (1) (r), और 3 (1) (s)।
केस की जांच का जिम्मा उपनिरीक्षक (SI) जितेन्द्र कुमार को सौंपा गया है।
निष्कर्ष (Legal Disclaimer)
यह रिपोर्ट पुलिस में दर्ज प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR) के आधार पर तैयार की गई है। कानून के अनुसार, किसी भी आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि अदालत में दोष सिद्ध न हो जाए। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।











