गया: जिले में लंबे समय से निबंधन (रजिस्ट्री) के लिए प्रतिबंधित जमीनों को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने जांच के बाद 2013 से ‘रोक सूची’ में शामिल 4 भूखंडों को विमुक्त करने का आदेश दिया है।
गया | 10 मार्च
जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि वर्ष 2013 से कुछ जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक लगी हुई थी। इन जमीनों के खाता-खेसरा की गहन जांच के बाद इन्हें अब रोक सूची से हटा दिया गया है। डीएम ने जिला अवर निबंधन पदाधिकारी और सभी डीसीएलआर (DCLR) को निर्देश दिया है कि रोक सूची से संबंधित अन्य फाइलों को भी जल्द प्रस्तुत करें, ताकि आम जनता को बेवजह कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
इन 4 जमीनों को मिली निबंधन की अनुमति:
- मानपुर अंचल: नौरंगा मौजा के राजेश कुमार वर्मा की जमीन (2013 से प्रतिबंधित)।
- टनकुप्पा अंचल: नावा गढ़ मौजा के शिवनंदन सिंह की जमीन (2013 से प्रतिबंधित)।
- टनकुप्पा अंचल: भीखमपुर मौजा के शम्भू शरण सिंह की जमीन (2013 से प्रतिबंधित)।
- वजीरगंज अंचल: सूढ़नी मौजा की मसो० आशा देवी की जमीन (2013 से प्रतिबंधित)।
क्या होती है रोक सूची (Restricted List)?
जब कोई जमीन सरकारी होती है, भू-अर्जन (Land Acquisition) के तहत आती है या न्यायालय में उसका मामला लंबित होता है, तो उसे रोक सूची में डाल दिया जाता है। ऐसी जमीनों की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। जिला स्तर पर गठित एक समिति (जिसमें ADM राजस्व, जिला अवर निबंधक, डीसीएलआर और संबंधित अंचल अधिकारी शामिल होते हैं) जांच करती है कि जमीन वास्तव में रैयती और विवाद मुक्त है या नहीं। रिपोर्ट सही पाए जाने पर ही उसे सूची से हटाया जाता है।
अधिकारियों को जांच में तेजी लाने का निर्देश
डीएम ने कहा कि जिले में कई जमीनों पर लंबे समय से रोक लगी है, जिसकी जांच प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो जमीन वास्तव में रैयती है और हर प्रकार के विवाद से मुक्त है, उसके निबंधन की अनुशंसा जल्द की जाए।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में जिले में 125 से अधिक ऐसे मामलों को रोक सूची से मुक्त किया जा चुका है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उन रैयतों को राहत देना है जो अपनी ही जमीन की खरीद-बिक्री के लिए वर्षों से परेशान हैं।












